Monday, June 6, 2011

आज़ाद पुलिस की अगली मुहिम उड़ीसा में

P180710_12.24_[01]गाज़ियाबाद में पुलिस और प्रशासन के भ्रष्टाचार के विरुद्ध अपने संघर्ष के पश्चात पिछले महीने मुंबई में अपनी मुहिम से लौटने के बाद आज़ाद पुलिस ब्रह्मपाल ने अपने अभियान को आगे बढाते हुए उड़ीसा के पुरी शहर को अपना नया ठिकाना बनाया है. आज़ाद पुलिस ब्रह्मपाल ने पुरी में अपनी मुहिम को १०-०६-२०१११ से प्रारम्भ करने का निश्चय् किया है. यहाँ पर अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पुलिस व्यवस्था का जायजा लेने के साथ साथ आज़ाद पुलिस द्वारा  अपनी ड्यूटी के प्रति, अपने नियम कानूनों के प्रति उदासीन पुलिस वालों के चालान भी काटे जायेंगे और वहाँ के कमिश्नर को इनसे अवगत कराया जाएगा… इस सम्बन्ध में आज़ाद पुलिस ने पहले ही उड़ीसा सरकार, पुलिस विभाग और अन्य विभागों को पत्र लिख कर अवगत करा दिया है…

4 comments:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

दिल्ली भी जाना पड़ेगा आपको..

Manpreet Kaur said...

अच्छा पोस्ट है जी !अपना महत्वपूर्ण टाइम निकाल कर मेरे ब्लॉग पर जरुर आए !
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रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" said...

लीगल सैल से मिले वकील की मैंने अपनी शिकायत उच्चस्तर के अधिकारीयों के पास भेज तो दी हैं. अब बस देखना हैं कि-वो खुद कितने बड़े ईमानदार है और अब मेरी शिकायत उनकी ईमानदारी पर ही एक प्रश्नचिन्ह है

मैंने दिल्ली पुलिस के कमिश्नर श्री बी.के. गुप्ता जी को एक पत्र कल ही लिखकर भेजा है कि-दोषी को सजा हो और निर्दोष शोषित न हो. दिल्ली पुलिस विभाग में फैली अव्यवस्था मैं सुधार करें

कदम-कदम पर भ्रष्टाचार ने अब मेरी जीने की इच्छा खत्म कर दी है.. माननीय राष्ट्रपति जी मुझे इच्छा मृत्यु प्रदान करके कृतार्थ करें मैंने जो भी कदम उठाया है. वो सब मज़बूरी मैं लिया गया निर्णय है. हो सकता कुछ लोगों को यह पसंद न आये लेकिन जिस पर बीत रही होती हैं उसको ही पता होता है कि किस पीड़ा से गुजर रहा है.

मेरी पत्नी और सुसराल वालों ने महिलाओं के हितों के लिए बनाये कानूनों का दुरपयोग करते हुए मेरे ऊपर फर्जी केस दर्ज करवा दिए..मैंने पत्नी की जो मानसिक यातनाएं भुगती हैं थोड़ी बहुत पूंजी अपने कार्यों के माध्यम जमा की थी.सभी कार्य बंद होने के, बिमारियों की दवाइयों में और केसों की भागदौड़ में खर्च होने के कारण आज स्थिति यह है कि-पत्रकार हूँ इसलिए भीख भी नहीं मांग सकता हूँ और अपना ज़मीर व ईमान बेच नहीं सकता हूँ.

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" said...

मेरा बिना पानी पिए आज का उपवास है आप भी जाने क्यों मैंने यह व्रत किया है.

दिल्ली पुलिस का कोई खाकी वर्दी वाला मेरे मृतक शरीर को न छूने की कोशिश भी न करें. मैं नहीं मानता कि-तुम मेरे मृतक शरीर को छूने के भी लायक हो.आप भी उपरोक्त पत्र पढ़कर जाने की क्यों नहीं हैं पुलिस के अधिकारी मेरे मृतक शरीर को छूने के लायक?

मैं आपसे पत्र के माध्यम से वादा करता हूँ की अगर न्याय प्रक्रिया मेरा साथ देती है तब कम से कम 551लाख रूपये का राजस्व का सरकार को फायदा करवा सकता हूँ. मुझे किसी प्रकार का कोई ईनाम भी नहीं चाहिए.ऐसा ही एक पत्र दिल्ली के उच्च न्यायालय में लिखकर भेजा है. ज्यादा पढ़ने के लिए किल्क करके पढ़ें. मैं खाली हाथ आया और खाली हाथ लौट जाऊँगा.

मैंने अपनी पत्नी व उसके परिजनों के साथ ही दिल्ली पुलिस और न्याय व्यवस्था के अत्याचारों के विरोध में 20 मई 2011 से अन्न का त्याग किया हुआ है और 20 जून 2011 से केवल जल पीकर 28 जुलाई तक जैन धर्म की तपस्या करूँगा.जिसके कारण मोबाईल और लैंडलाइन फोन भी बंद रहेंगे. 23 जून से मौन व्रत भी शुरू होगा. आप दुआ करें कि-मेरी तपस्या पूरी हो

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